Jashn-E-Bahaaraa जश्न -ए- बहाराँ ( उपन्यास)
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Description
जश्न -ए-बहारों’ का फलक एक उपन्यासिका का है। इस उपन्यास का तंतुविन्यास प्रमुख रूप में स्मृति और शेष के संबंधों पर आधारित है। स्मृति और शेष का संबंध दूरभाष पर स्थापित होता है। अमृतसर में रहने वाली युवती के लिए पहाड़ी जीवन की नीरवता, वातावरण और नायक से निरन्तर वार्तालाप से उत्पन्न अनुराग मुग्ध करते हैं। पहाड़ों की सैर करने के बाद भी उसकी स्मृतियों में पहाड़ सजीव बन कर बसे रहते हैं। ‘डैफोडिल्स’ के समान। शेष से लम्बी बातचीत का सिलसिला प्रारंभ होता है। रुचियों, अभिरुचियों, अनुभूतियों की अभिव्यंजना के मध्य अनवरत संवाद प्रायः चलता रहता है। इसी संदर्भ सूत्र के माध्यम से शेष धीरे-धीरे स्मृति के प्रेम सूत्र में अनायास ही बंधने लगता है। स्मृति शेष के प्रति अपने प्रेम की अभिव्यक्ति पोशीदा नहीं रख पाती। संवादों के अनुक्रम में दोनों अपनी अभिरुचियों और कार्यकलापों की जानकारी देते हैं। शेष उसे बताता है कि उसने कबायली क्षेत्र की महिलाओं के जमीनी अधिकार को लेकर एक उपन्यास की रचना की है।



